GK BUCKET

Jul 17, 2026

प्रश्‍न- संवैधानिक नैतिकता एक स्वाभाविक प्रवृति नहीं है। इसको विकसित करने की जरूरत है। इस कथन के आलोक में संवैधानिक नैतिकता की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा स्थापित किया गया है। [38] 71th BPSC PYQ

प्रश्‍न- संवैधानिक नैतिकता एक स्वाभाविक प्रवृति नहीं है। इसको विकसित करने की जरूरत है। इस कथन के आलोक में संवैधानिक नैतिकता की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा स्थापित किया गया है। [38] 71th BPSC PYQ

 

उत्‍तर- डॉ. अंबेडकर ने कहा था कि “संवैधानिक नैतिकता कोई स्वाभाविक प्रवृत्ति नहीं है, इसे विकसित और पोषित करना पड़ता है।” उनका यह कथन भारतीय लोकतंत्र की मूल आत्मा को अभिव्यक्त करता है। संवैधानिक नैतिकता का अर्थ केवल संविधान का औपचारिक पालन नहीं, बल्कि उसके मूल आदर्शों न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को शासन, समाज और नागरिक जीवन में व्यवहारिक रूप से स्थापित करना है।

 

संवैधानिक नैतिकता के तीन स्तंभ हैं:

  1. प्रक्रियागत - संस्थाएँ संविधान सम्मत तरीके से काम करें
  2. मूल्यगत -स्वतंत्रता, समानता, बंधुता का पालन हो
  3. परिणामगत- हाशिये के वर्गों की गरिमा सुरक्षित हो

 

लोकप्रिय नैतिकता

संवैधानिक नैतिकता

परंपरा एवं बहुमत आधारित

संविधान आधारित

सामाजिक-धार्मिक मान्यताएँ

मौलिक अधिकार एवं गरिमा

बहुसंख्यक इच्छा

विधि का शासन

परिवर्तनशील

स्थायी एवं संरक्षित

 

संवैधानिक नैतिकता व्यक्ति की गरिमा और अधिकारों को बहुमत की इच्छा से ऊपर रखती है। भारतीय समाज में जाति, पितृसत्ता, धार्मिक रूढ़ियाँ और बहुसंख्यकवादी प्रवृत्तियों के कारण यह नैतिकता स्वतः विकसित नहीं होती इसलिए सर्वोच्च न्यायालय ने इसे लोकतंत्र की आधारशिला के रूप में विकसित किया है।

 

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संवैधानिक नैतिकता की स्थापना

  1. नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ (2018)- न्यायालय ने धारा 377 को निरस्त करते हुए कहा कि “लोकप्रिय नैतिकता को संवैधानिक नैतिकता के समक्ष झुकना होगा।” इससे समलैंगिक समुदाय के गरिमा एवं निजता के अधिकार को मान्यता मिली।
  2. इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन बनाम केरल राज्य (2018)-सबरीमाला प्रकरण में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध हटाते हुए न्यायालय ने लैंगिक समानता को धार्मिक परंपरा से ऊपर रखा। इससे संवैधानिक मूल्यों और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन पर बहस उत्पन्न हुई।
  3. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017)- न्यायालय ने निजता (Privacy/निजता) को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार घोषित किया। व्यक्ति की स्वायत्तता और गरिमा को संवैधानिक नैतिकता का हिस्सा माना गया।
  4. शायरा बानो बनाम भारत संघ (2017)- तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर न्यायालय ने महिला समानता और गरिमा को धार्मिक प्रथाओं से ऊपर रखा।

 

इस प्रकार न्‍यायालय ने संवैधानिक नैतिकता के आधार पर अपने निर्णयों के माध्‍यम से जहां दलितों, महिलाओं, LGBTQ+ समुदाय की रक्षा की वहीं बहुमत की तानाशाही पर अंकुश भी लगाया। "जीवंत संविधान" की अवधारणा में भी न्‍यायालय कई बार संवैधानिक नैतिकता की शक्तियों का प्रयोग करती है। हांलाकि संवैधानिक नैतिकता की सीमाएँ है और कई बार आलोचनाएँ भी होती है जैसे-


  1. न्यायिक सक्रियता बनाम लोकतांत्रिक वैधता- "क्या अनिर्वाचित न्यायाधीश निर्वाचित संसद के ऊपर नैतिकता थोप सकते हैं?" यहां पर न्यायपालिका की संवैधानिक नैतिकता कभी-कभी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दरकिनार करती दिखती है।
  2. मतभिन्‍नता- संवैधानिक नैतिकता की कोई निश्चित परिभाषा नहीं होने से अलग-अलग न्यायाधीश एक ही मुद्दे पर अलग-अलग व्याख्या करते हैं।
  3. सामाजिक वास्तविकता से दूरी- न्यायालय के निर्णय कागज़ पर संवैधानिक नैतिकता स्थापित करते हैं, परंतु ज़मीनी क्रियान्वयन बिना सामाजिक परिवर्तन के संभव नहीं। उदाहरण के लिए मैला ढोने पर प्रतिबंध के बावजूद प्रथा जारी है।
  4. सांस्कृतिक संवेदनशीलता- क्या न्यायपालिका धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में हस्तक्षेप करने की वैध संस्था है? यह बहस अभी भी अनुत्तरित है।

 

स्पष्ट है कि संवैधानिक नैतिकता कोई स्वाभाविक सामाजिक प्रवृत्ति नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्थागत अनुशासन और नागरिक चेतना से विकसित होने वाली लोकतांत्रिक संस्कृति है। सर्वोच्च न्यायालय ने इसे समानता, गरिमा और स्वतंत्रता के माध्यम से सशक्त किया है। किंतु इसकी वास्तविक सफलता तभी संभव है जब संवैधानिक मूल्य न्यायालयों से निकलकर समाज के दैनिक व्यवहार और राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन जाएँ।



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Jul 15, 2026

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71th BPSC प्रश्‍न- संघवाद के स्थायित्व और कार्य प्रणाली पर बहुलवादी राजनीतिक दलों के प्रभाव का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। मिली जुली सरकार या गठबंधन ने सहकारी संघवाद या प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद को मजबूत या कमजोर किया है। व्याख्या कीजिए। [38] 71th BPSC PYQ

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Jul 10, 2026

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Jul 3, 2026

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