Discuss the major ports on eastern coast of India. Critically examine the role of Syama Prasad Mookerjee Port, Kolkata (SMPK) in the development of North East India and Bangladesh, giving suitable examples. [38]
71th BPSC Mains प्रश्न- भारत के पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाहों पर चर्चा कीजिए।
उपयुक्त उदाहरणों सहित उत्तर पूर्वी भारत और बांग्लादेश के विकास में श्यामा
प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह, कोलकाता (एसएमपीके) की
भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (38)
उत्तर-
भारत का पूर्वी तट बंगाल की खाड़ी के साथ लगभग 3,000 किमी तक फैला है जो
दक्षिण-पूर्व एशिया,
बांग्लादेश तथा उत्तर-पूर्वी भारत के साथ व्यापारिक एवं सामरिक
संपर्क का प्रमुख माध्यम है। इस तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह भारत की ब्लू इकोनॉमी,
लॉजिस्टिक्स, निर्यात तथा Act East
Policy को गति प्रदान करते हैं।
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भारत के पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाह |
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बंदरगाह |
राज्य |
प्रमुख विशेषता |
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श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह |
पश्चिम बंगाल |
भारत का एकमात्र प्रमुख नदी बंदरगाह |
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पारादीप बंदरगाह |
ओडिशा |
कोयला एवं खनिज निर्यात का प्रमुख केंद्र |
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विशाखापत्तनम बंदरगाह |
आंध्र प्रदेश |
प्राकृतिक गहरे पानी का बंदरगाह |
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चेन्नई बंदरगाह |
तमिलनाडु |
कंटेनर एवं ऑटोमोबाइल निर्यात केंद्र |
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कामराजार बंदरगाह |
तमिलनाडु |
भारत का पहला कॉर्पोरेट बंदरगाह |
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वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह |
तमिलनाडु |
दक्षिणी समुद्री व्यापार का प्रमुख
केंद्र |
उत्तर-पूर्वी भारत एवं
बांग्लादेश के विकास में श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह की भूमिका
उत्तर-पूर्व भारत का “समुद्री द्वार”
पूर्वोत्तर के
अधिकांश राज्य स्थलरुद्ध (Landlocked)
हैं। असम की चाय, त्रिपुरा का रबर, मेघालय का चूना पत्थर तथा पेट्रोलियम उत्पाद इसी के माध्यम से वैश्विक
बाजार तक पहुँचते हैं।
अंतर्देशीय जलमार्ग
यह बंदरगाह राष्ट्रीय जलमार्ग-1
(गंगा) एवं राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (ब्रह्मपुत्र) को जोड़ता है। भारत-बांग्लादेश
प्रोटोकॉल रूट के माध्यम से कम लागत पर माल परिवहन संभव हुआ है।
Act East Policy
यह भारत की Act East Policy का प्रमुख लॉजिस्टिक आधार है। उदाहरण के लिए कलादान मल्टीमॉडल परियोजना,
BBIN (Bangladesh-Bhutan-India-Nepal) संपर्क में महत्वपूर्ण है।
लागत एवं व्यापार प्रवाह
ट्रांजिट
एवं ट्रांसशिपमेंट सुविधा से बांग्लादेश के चटगाँव एवं मोंगला बंदरगाह का संपर्क
बढ़ा जिससे दोनों देशों के व्यापार लागत में कमी आयी और व्यापार प्रवाह बढ़ा।
क्षेत्रीय विकास
श्यामा प्रसाद
मुखर्जी बंदरगाह कोलकाता उत्तर‑पूर्वी
भारत‑बांग्लादेश‑नेपाल‑
भूटान के भीतर व्यापार आपूर्ति‑श्रृंखलाओं
को जोड़ क्षेत्रीय विकास और रोज़गार बढ़ता है।
यह
बंदरगाह अन्य हाई‑सीडिंग लाइनों के साथ मिलकर यह कम
समय में एवं कम लागत में भारी माल को चीन और दक्षिण‑पूर्व
एशिया से उत्तर‑पूर्वी भारत तक पहुँचाती हैं।
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चुनौतियाँ
- तकनीक निर्भरता- श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह में हाई‑सीडिंग जहाज‑हैंडलिंग, नदी‑सफ़ाई, तकनीक‑गहन हैं जो रखरखाव‑लागत और तकनीकी निर्भरता बढ़ाते हैं।
- स्थानीय बाधाएँ- हुगली में नदी‑सफ़ाई, जल‑वितरण और नदी‑कटाव होने से समय और लागत बढ़ने के साथ “स्थानीय‑संचालन” पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
निष्कर्षत:
श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पूर्वोत्तर भारत और बांग्लादेश के लिए आर्थिक
जीवनरेखा है। यह क्षेत्रीय संपर्क, व्यापार, जलमार्ग आधारित लॉजिस्टिक्स तथा Act East Policy का
केंद्रीय स्तंभ बन चुका है।
भविष्य
में आधुनिकीकरण एवं क्षेत्रीय सहयोग के साथ, सागरमाला परियोजना के तहत
आधुनिकीकरण, हल्दिया डॉक का विस्तार, AI आधारित पोर्ट प्रबंधन, रेल-सड़क-जलमार्ग का एकीकरण
जैसे उपायों को बढ़ाया जाए तो यह बंदरगाह उत्तर-पूर्वी भारत को दक्षिण-पूर्व
एशिया से जोड़ने वाला “गेटवे बंदरगाह” बन सकता है।